Vice President of India का Resign – Health Reason या Political Game?

भारतीय राजनीति में अचानक होने वाले फैसलों के पीछे क्या चलता है, यह आम जनता नहीं समझ पाती। Vice President of India जगदीप धनखड़ का इस्तीफा भी वैसा ही एक फैसला है, जिसे सिर्फ स्वास्थ्य कारण मान लेना बेहद आसान है। लेकिन राजनीति में दिखाया जाने वाला कारण और असली कारण अलग होते हैं – और इस बार भी ऐसा ही लगता है।

धनखड़, जिन्होंने 11 अगस्त 2022 को उपराष्ट्रपति पद की शपथ ली थी, उन्होंने महज तीन साल के भीतर ही 21 जुलाई 2025 को अपना इस्तीफा राष्ट्रपति को सौंप दिया। वजह बताई गई – Health Issues. लेकिन सवाल यह है कि क्या सत्ता के गलियारों में वाकई उनका स्वास्थ्य परेशानी बन गया था, या उनकी स्वतंत्र सोच

क्या अब Vice President of India के साथ भी Political Games हो रहे हैं?

भारत में उपराष्ट्रपति का पद एक निष्पक्ष और गैर-राजनीतिक पद माना जाता है। लेकिन मौजूदा दौर में यह धारणा बदलती दिख रही है। जगदीप धनखड़ का अचानक इस्तीफा इसी नई राजनीतिक हकीकत की ओर इशारा करता है।
ध्यान दें कि धनखड़ पिछले कुछ समय से संसद में बार-बार विपक्ष की आवाज को उचित मंच देने की बात कर रहे थे। उन्होंने सत्ता पक्ष और विपक्ष दोनों को समान अवसर देने का प्रयास किया। लेकिन क्या यही उनकी गलती थी?

राजनीतिक विश्लेषक मान रहे हैं कि:

उन्हें हटाकर सत्ता कोई नया और नियंत्रित चेहरा लाना चाहती है।

सवाल है कि क्या भारत का लोकतंत्र अब इतना कमजोर हो चुका है कि Vice President जैसे संवैधानिक पद पर भी सत्ता की सहमति जरूरी हो गई है?
क्या उपराष्ट्रपति का पद अब सत्ता संतुलन का नया मोहरा बन चुका है?

यह इस्तीफा सिर्फ स्वास्थ्य कारणों का मामला नहीं है – यह सत्ता का एक सोचा-समझा राजनीतिक फैसला नजर आता है

Vice President of India के इस्तीफे पर विपक्ष का बयान – सरकार को सच सुनना मंजूर नहीं?

धनखड़ के इस्तीफे के बाद विपक्ष ने भी सरकार पर सीधा निशाना साधा है। विपक्ष के नेताओं ने सवाल उठाया है कि क्या संसद में सच बोलने की कीमत उपराष्ट्रपति को चुकानी पड़ी?

विपक्ष से जुड़े नेता दीपक खत्री ने एक ट्वीट में यह आरोप लगाया कि धनखड़ को विपक्ष की आवाज को मंच देने की सजा दी गई है।
उनके ट्वीट में जगदीप धनखड़ का संसद में दिया गया वह बयान वायरल हो रहा है, जिसमें उन्होंने कहा था:

“मैं ऑपरेशन सिंधूर पर विपक्ष को जितना समय चाहिए, उतनी देर तक चर्चा सुनिश्चित करूंगा।”

खत्री ने सरकार पर तंज कसते हुए कहा:

“क्या यही वजह है कि उन्हें इस्तीफा देने के लिए मजबूर किया गया? क्या मोदी सरकार को अब सच बोलना भी मंजूर नहीं?”

विपक्ष का कहना है कि जिस उपराष्ट्रपति ने विपक्ष को खुलकर बोलने का हक दिया, वही अब सत्ता के लिए बोझ बन गए। इस पूरे मामले ने भारतीय लोकतंत्र के वर्तमान चेहरे को एक बार फिर बेनकाब कर दिया है

सत्ता के लिए खतरा बने Vice President को हटा दिया गया?

भारतीय राजनीति में सत्ता अब किसी भी पद को राजनीति से परे नहीं मानती।
Vice President of India जैसे संवैधानिक पद भी अब राजनीतिक रणनीतियों का हिस्सा बन चुके हैं।
जगदीप धनखड़ का इस्तीफा इस बात का संकेत है कि भारतीय लोकतंत्र अब सिर्फ दिखावे का मंच बनकर रह गया है, जहां संवैधानिक पद पर बैठे व्यक्ति को भी सत्ता के आदेश के आगे झुकना पड़ता है।

सवाल ये भी है कि जिस व्यक्ति ने कुछ ही घंटों पहले संसद में विपक्ष को खुलकर बोलने का अधिकार दिलाने की बात कही थी, वो अचानक इतनी गंभीर स्वास्थ्य समस्या में आ गया कि उसी दिन इस्तीफा देना पड़ा?
क्या वाकई उनकी तबीयत इतनी खराब हो गई थी कि इस्तीफा ही एकमात्र रास्ता बचा था?

या फिर ये ‘स्वास्थ्य कारण’ महज एक औपचारिक बहाना है – जिससे सत्ता ने असली वजह छिपा दी?

हकीकत ये है कि सच को स्वीकार करने का साहस अब भारत की सत्ता में बचा नहीं है।
धनखड़ का इस्तीफा एक राजनीतिक सफाई अभियान जैसा दिखता है, जहां सत्ता के लिए असुविधाजनक व्यक्ति को रास्ते से हटा दिया जाता है।

आज सवाल यह नहीं कि अगला उपराष्ट्रपति कौन बनेगा। असली सवाल है –
क्या भारतीय लोकतंत्र में अब सच बोलना ही सबसे बड़ा अपराध बन चुका है?
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