रॉबर्ट वाड्रा फिर फंसे? मनी लॉन्ड्रिंग का नया धमाका!/Robert Vadra Again in ED Radar – Rahul Gandhi’s Defense or Political Drama?

पिछले 10 सालों से चल रहे मनी लॉन्ड्रिंग केस में एक बार फिर Robert Vadra सुर्खियों में हैं। कांग्रेस के दामाद के खिलाफ चल रही जांच दोबारा तेज हो गई है। मनी लॉन्ड्रिंग और जमीन घोटाले से जुड़े इस मामले में Enforcement Directorate (ED) का शिकंजा वाड्रा पर कसता जा रहा है।

रॉबर्ट वाड्रा पर आरोप है कि उन्होंने जमीन सौदों के जरिए करोड़ों रुपये की हेराफेरी की। इस मामले में ईडी पहले भी पूछताछ कर चुकी है और अब नई चार्जशीट दाखिल होने की खबरें हैं।

लेकिन सबसे बड़ा सवाल वही है—क्या वाकई Robert Vadra दोषी हैं?
या ये सब एक राजनीतिक खेल का हिस्सा है?

Robert Vadra के बचाव में राहुल गांधी, लेकिन कांग्रेस के पुराने घोटालों पर चुप्पी क्यों?

जैसे ही Robert Vadra के खिलाफ जांच की खबरें आईं, राहुल गांधी तुरंत उनके समर्थन में आ गए। राहुल गांधी ने ट्वीट कर कहा कि यह सब एक राजनीतिक साजिश है और वाड्रा को टारगेट किया जा रहा है।

लेकिन यहां सवाल ये है कि राहुल गांधी हमेशा वाड्रा का ही बचाव क्यों करते हैं?
आज तक उन्होंने कांग्रेस के पुराने घोटालों पर कभी खुलकर सफाई क्यों नहीं दी?

कोल घोटाला

2G स्पेक्ट्रम घोटाला

इन सभी घोटालों की जिम्मेदारी से राहुल गांधी ने हमेशा खुद को दूर ही रखा है। क्या ये भी राजनीतिक साजिश थी या फिर हकीकत?

इतना ही नहीं, जब देश में I.N.D.I.A. गठबंधन बना, तो राहुल गांधी ने सत्ता के लिए लालू यादव जैसे नेताओं से भी हाथ मिला लिया, जो खुद चारा घोटाले में दोषी साबित हो चुके हैं। भ्रष्ट नेताओं से हाथ मिलाने में राहुल गांधी को कोई हिचक नहीं हुई, लेकिन इस पर कभी सफाई नहीं दी गई।

तो क्या सत्ता का मोह सच से ज्यादा जरूरी हो गया है?

Robert Vadra को बचाने में जुटे राहुल गांधी, या वाकई भ्रष्टाचार के खिलाफ हैं?

राहुल गांधी खुद को भ्रष्टाचार के खिलाफ लड़ने वाला नेता बताते हैं। लेकिन हकीकत कुछ और ही दिखती है।

राहुल गांधी और सोनिया गांधी दोनों के खिलाफ नेशनल हेराल्ड केस में जांच चल रही है।

इसके बावजूद राहुल गांधी खुद को ईमानदार नेता साबित करने की कोशिश करते रहते हैं।

सिर्फ इतना ही नहीं, राहुल गांधी ने जिन नेताओं के साथ गठबंधन किया है, उनके खिलाफ भी भ्रष्टाचार के गंभीर आरोप हैं:

अरविंद केजरीवाल – दिल्ली के शराब घोटाले में आरोपी।

लालू प्रसाद यादव – चारा घोटाले में दोषी।

हेमंत सोरेन – खनन और भूमि घोटाले में ईडी की कार्रवाई झेल चुके हैं।

सत्येंद्र जैन – मनी लॉन्ड्रिंग में जेल जा चुके हैं।

अभिषेक बनर्जी (ममता बनर्जी का भतीजा) – कोयला और शिक्षक भर्ती घोटाले की जांच का सामना कर रहे हैं।

सवाल ये है कि क्या राहुल गांधी भ्रष्टाचार के खिलाफ लड़ाई लड़ रहे हैं, या सत्ता के लिए भ्रष्ट नेताओं का साथ मजबूरी में नहीं, बल्कि रणनीति के तहत ले रहे हैं?

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हम क्यों सवाल पूछना भूल चुके हैं?

आज की राजनीति में विडंबना ये है कि जिसके खुद के हाथ घोटालों में सने हैं, वही नेता दूसरों को ईमानदारी का पाठ पढ़ा रहे हैं।

राहुल गांधी हों या कोई और नेता — सत्ता पक्ष में हों या विपक्ष में — हर कोई सिर्फ सत्ता के लिए खेल रहा है।

Robert Vadra का बचाव करने वाले राहुल गांधी शायद ये भूल गए हैं कि उनके गठबंधन के कई नेता खुद गंभीर भ्रष्टाचार के मामलों में घिरे हुए हैं।
लेकिन सबसे बड़ी बात ये है कि जनता अब सवाल पूछना ही भूल चुकी है।

जब ये नेता मंच से भाषण देते हैं, तो जनता चुपचाप सुनती रहती है।
कोई नहीं पूछता कि –
जो खुद केस झेल रहे हैं, वो नैतिकता की बातें कैसे कर सकते हैं?
आखिर हम सवाल क्यों नहीं पूछते?

जब तक जनता सवाल नहीं पूछेगी, तब तक ये दिखावा, दोगलापन और सत्ता का खेल यूं ही चलता रहेगा।

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