हमने अक्सर फिल्मों में देखा है कि राजनीति में कुर्सी पाने के लिए Booth Capturing, फर्जी वोट, और चुनाव के डब्बों के गायब होने या उनमें छेड़छाड़ की जाती है। लेकिन अफ़सोस, ये सिर्फ़ फिल्मी कहानी नहीं — असलियत में भी लोकतंत्र के इस मंदिर में ऐसे अपराध होते रहे हैं। सत्ता की भूख जब जनता की आवाज़ से बड़ी हो जाती है, तब “Votechori” लोकतंत्र का खून बहा देती है।
लोकतंत्र में चुनाव महज़ एक प्रक्रिया नहीं, बल्कि जनता की इच्छा को राजनीतिक व्यवस्था में बदलने का माध्यम है। अगर इस प्रक्रिया पर ही भरोसा उठ जाए, तो पूरा लोकतांत्रिक ढांचा खोखला हो जाता है। इसलिए Votechori सिर्फ़ एक अपराध नहीं, बल्कि एक गंभीर सामाजिक और संवैधानिक खतरा है।
Votechori पर राहुल गांधी ने खोला पर्दा – एक लाख से अधिक फर्जी वोट का आरोप
दिल्ली में आयोजित एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में राहुल गांधी ने दावा किया कि कर्नाटक के महादेवपुरा विधानसभा क्षेत्र में न सिर्फ़ डुप्लीकेट और फर्जी वोटर हैं, बल्कि बड़े पैमाने पर वोटर लिस्ट में छेड़छाड़ भी की गई है — वो भी पाँच प्रमुख माध्यमों से। उन्होंने इसे लोकतंत्र की जड़ें खोखली करने वाली सुनियोजित साज़िश बताया।
उनके अनुसार, एक ही नाम से अलग-अलग मतदान केंद्रों पर वोट दर्ज हैं, मृत व्यक्तियों के नाम अब भी लिस्ट में मौजूद हैं, और कई ऐसे नाम भी शामिल हैं जो उस क्षेत्र के निवासी ही नहीं हैं। अगर ये आरोप सच हैं, तो सवाल उठता है — क्या हमारा वोट वाकई सुरक्षित है, या फिर यह केवल आंकड़ों का खेल बनकर रह गया है?
EVM विवाद – तकनीक पर भरोसा या शक?
पिछले कई सालों से, जब से देश में चुनाव EVM पर शिफ्ट हुए हैं, लगभग हर हारने वाला पक्ष यह आरोप लगाता आया है कि EVM को हैक या छेड़छाड़ किया गया। कभी इसे सॉफ़्टवेयर मैनीपुलेशन का मामला कहा गया, तो कभी डेटा ट्रांसफर में गड़बड़ी का। हालांकि, चुनाव आयोग बार-बार इन आरोपों को खारिज करता रहा है, लेकिन जनता के मन में सवाल अब भी बाकी हैं।
दुनिया के कई देशों ने EVM को अपनाया है, लेकिन कई ने इसे छोड़ भी दिया है। उदाहरण के लिए, जर्मनी और नीदरलैंड ने पारदर्शिता की कमी के कारण इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग सिस्टम को खत्म कर दिया। भारत में हालांकि EVM के साथ VVPAT सिस्टम लागू किया गया है, ताकि हर वोट का पेपर ट्रेल मौजूद हो, लेकिन इसका 100% मिलान अभी भी नहीं होता।
Votechori के आरोपों पर ECI का जवाब
चुनाव आयोग (ECI) का कहना है कि “Votechori” के तमाम आरोप बेबुनियाद हैं। EVM मशीनें पूरी तरह से सुरक्षित हैं, इंटरनेट से कनेक्ट नहीं होतीं, और हर वोट का VVPAT रिकॉर्ड उपलब्ध होता है। आयोग का तर्क है कि मशीनों की सीलिंग, कड़ी सुरक्षा, और रैंडमाइजेशन की प्रक्रिया के चलते हैकिंग या छेड़छाड़ संभव ही नहीं है।
ECI ने तो एक बार यह तक कह दिया था कि वे लाइव टीवी पर ओपन चैलेंज देने को तैयार हैं — जो भी पार्टी या व्यक्ति मानता है कि EVM हैक हो सकती है, वो आकर करके दिखाए। लेकिन उस समय किसी भी राजनीतिक दल ने इस चुनौती को स्वीकार नहीं किया।
आयोग का मानना है कि Booth Capturing या फर्जी वोटिंग जैसी घटनाएं अब पहले के मुकाबले काफी कम हो गई हैं, और अगर कहीं गड़बड़ी मिलती है तो तुरंत कार्रवाई की जाती है। बावजूद इसके, विपक्षी दल और कई एक्टिविस्ट मानते हैं कि पारदर्शिता बढ़ाने के लिए 100% VVPAT मिलान और स्वतंत्र ऑडिट ज़रूरी है।
लोकतंत्र में पारदर्शिता का महत्व
लोकतंत्र में जीत और हार का फैसला जनता करती है, लेकिन अगर जनता को यह महसूस हो कि उसका वोट मायने नहीं रखता, तो यह व्यवस्था के लिए सबसे बड़ा खतरा है। चुनाव केवल परिणाम का नाम नहीं, बल्कि एक भरोसे का नाम है। यह भरोसा टूटते ही लोग राजनीति से दूरी बनाने लगते हैं, और फिर भ्रष्ट तंत्र को खुली छूट मिल जाती है।
सवाल सत्तापक्ष और विपक्ष दोनों से:
Votechori सिर्फ़ एक चुनावी गड़बड़ी नहीं, बल्कि लोकतंत्र की आत्मा पर किया गया सीधा हमला है। चाहे आरोप विपक्ष लगाए या सत्ताधारी दल, सच यह है कि जब तक चुनावी प्रक्रिया पर जनता का भरोसा पूरी तरह बहाल नहीं होता, तब तक लोकतंत्र अधूरा रहेगा।
हम, एक मतदाता के रूप में, यह तो तय नहीं कर सकते कि कौन सच बोल रहा है और कौन झूठ। लेकिन अगर सच में Votechori हो रही है, तो यह लोकतंत्र का सबसे बड़ा क़त्ल है। और अगर विपक्ष झूठ बोल रहा है, तो सवाल यह भी उठता है — जहाँ आप जीते हैं, क्या वहाँ आपने भी EVM हैक की थी? अगर नहीं, तो तब आप क्यों चुप रहे? क्या सिर्फ़ इसलिए कि उस वक़्त आप जीत गए थे?
EVM हो या बैलेट पेपर — पारदर्शिता, जवाबदेही और कड़ी निगरानी ही इस समस्या का असली समाधान हैं। सत्ता की कुर्सी पाने की भूख अगर जनता के विश्वास से बड़ी हो जाएगी, तो लोकशाही का खून बहना तय है। अब ज़िम्मेदारी सिर्फ़ नेताओं की नहीं, बल्कि हर जागरूक नागरिक की है कि वह अपने वोट और लोकतंत्र की सुरक्षा के लिए आवाज़ उठाए
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