गृह मंत्री Amit Shah का जवाब

29 जुलाई को संसद का माहौल तब गर्म हो गया जब गृह मंत्री Amit Shah का जवाब ने ऑपरेशन सिंदूर पर उठे सवालों का जवाब न केवल तथ्यों से दिया, बल्कि अपने तीखे तेवरों से विपक्ष को सीधी घेर लिया। विपक्ष द्वारा इस मिशन को ‘नकली’ और ‘इवेंटबाज़ी’ कहे जाने पर अमित शाह ने संसद में दहाड़ते हुए कहा – “जिनके खून में राष्ट्रवाद नहीं, उन्हें हर ऑपरेशन प्रचार लगता है।”

उनके भाषण में सिर्फ शब्द नहीं थे, बल्कि वो गुस्सा था जो देश की सेना और सुरक्षा पर सवाल उठाने वालों के खिलाफ में था।

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सेना पर सवाल? शाह और पात्रा ने विपक्ष को आईना दिखाया

जब विपक्ष ने ऑपरेशन सिंदूर को लेकर सवाल उठाए और उसे एक “राजनीतिक इवेंट” बताया, तो गृह मंत्री Amit Shah ने संसद में दो टूक कहा –

“सेना का अपमान अब राजनीति का ज़रिया बन चुका है, ये दुर्भाग्यपूर्ण है।”

उन्होंने यह भी जोडा कि सरकार की नीति साफ है, और जो लोग हर राष्ट्रीय मिशन को शक की नजर से देखते हैं, उन्हें आत्मचिंतन करना चाहिए।

वहीं भाजपा प्रवक्ता डॉ. संबित पात्रा ने भी तीखे हमला करते हुए कहा –

राहुल गांधी अब पाकिस्तान के टीवी चैनलों पर हीरो बना दिए गए हैं, क्योंकि वो वही बातें कर रहे हैं जो पाकिस्तान को सूट करती हैं। उन्होंने विपक्ष पर आरोप किया कि वे सेना के पराक्रम पर सवाल उऐठाकर अंतराराष्ट्रीय मंच पर भारत की छवि को कमजोर कर रहे हैं।

Amit Shah ने चेताया, Modi ने चपेटा!

हमने अक्सर देखा है कि जब दो सच्चे दोस्त एक विज़न और इरादे के साथ साथ आते हैं, तो कुछ बड़ा और प्रभावशाली होता है—चाहे वो बिज़नेस हो या देश का भविष्य। Narendra Modi, Amit Shah की जोड़ी भी कुछ वैसी ही है।

2014 के बाद से, देश ने देखा है कि जब भी ये दोनों नेता संसद में किसी बहस या चुनौती का सामना करते हैं, तो उनका रुख आक्रामक, स्पष्ट और राष्ट्रहित में बेबाक होता है।
ऑपरेशन सिंदूर पर संसद में विपक्ष के आरोपों के बीच एक बार फिर वही जोड़ी एक्शन मोड में नज़र आई।

Amit Shah ने संसद में चेताया –

सेना के शौर्य पर सवाल उठाना, देश के आत्मसम्मान पर हमला है।

और पीएम मोदी ने चपेटा मारा –
कुछ लोगों को देश की ताकत में कमियां दिखती हैं, क्योंकि उनकी सोच सिर्फ दल तक सीमित है, देश तक नहीं।”

विपक्ष को जवाब सिर्फ शब्दों से नहीं, बल्कि साफ नीयत और मजबूत मंशा से मिला। शाह और मोदी ने मिलकर संसद में यह जता दिया कि राष्ट्रवाद पर कोई समझौता नहीं होगा।

कौन है सच्चा — सत्ता पक्ष या विपक्ष?

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ऑपरेशन सिंदूर को लेकर संसद में चली बहस ने एक बड़ा प्रश्न खड़ा कर दिया है — सच कौन बोल रहा है? सत्ता पक्ष या विपक्ष?

सच्चाई यह है कि एक सामान्य नागरिक के रूप में हमें यह स्पष्ट रूप से नहीं पता चल पाता कि कौन पूरी तरह सच बोल रहा है और कौन नहीं।
परंतु एक बात निश्चित है — जब विषय देश की सुरक्षा, सेना के पराक्रम और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत की छवि से जुड़ा हो, तब राजनीति को कुछ समय के लिए किनारे रखना चाहिए।

विपक्ष का काम है सवाल पूछना, और यह लोकतंत्र की ताकत है। लेकिन जब राष्ट्र किसी संवेदनशील मिशन या संकट से गुज़र रहा हो, तब विपक्ष से यह अपेक्षा की जाती है कि वह अपने राजनीतिक मतभेदों को कुछ समय के लिए अलग रखकर, देश के साथ खड़ा दिखाई दे।

दुर्भाग्यवश, हमने देखा कि कुछ विपक्षी नेताओं ने ऐसे मौके पर भी मीडिया में जाकर अपनी ही सरकार पर आरोपों की बौछार कर दी — और वो भी ऐसी भाषा में, जिसे विदेशी मीडिया ने भारत-विरोधी प्रचार के लिए इस्तेमाल किया।

वहीं, सत्ता पक्ष को भी यह समझना होगा कि यदि विपक्ष वर्तमान मुद्दों पर सवाल कर रहा है, तो उसका उत्तर भी वर्तमान संदर्भ में ही दिया जाए।
हर सवाल का जवाब पिछली सरकारों की गलतियों की लंबी सूची सुनाकर नहीं दिया जा सकता।
आज की सरकार की ज़िम्मेदारी है कि वह आज के प्रश्नों का उत्तर दे — स्पष्ट, संतुलित और तथ्यों के साथ।

लोकतंत्र का मूल सौंदर्य इसी में है कि जब एक पक्ष सवाल करे, तो दूसरा पक्ष जवाबदेही के साथ जवाब दे, न कि दोनों पक्ष एक-दूसरे की राष्ट्रभक्ति पर संदेह करने लगें.