विधानसभा में बवाल : आव्हाड-पडळकर कार्यकर्ता भिड़े / Assembly Clash: Awhad-Padalkar Workers Fight

आए दिन हम देखते हैं कि कहीं ना कहीं कहा-सुनी हो रही है, झगड़े हो रहे हैं।
पर इस बार बात कुछ अलग है… सीधा झगड़ा हुआ है महाराष्ट्र के सबसे महत्वपूर्ण जगह – विधानभवन में।

जहां जनता के मुद्दों पर बहस होनी चाहिए, वहीं अब नेता और उनके समर्थक आपस में भिड़ते नजर आ रहे हैं। ताजा मामला है राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शरद पवार गट) के नेता जीतेंद्र आव्हाड और भाजपा नेता गोपीचंद पडळकर के कार्यकर्ताओं के बीच हुए झगड़े का, जो विधानसभा परिसर के भीतर हुआ। ये सिर्फ एक झगड़ा नहीं है, बल्कि राजनीति की गिरती हुई हालत का आईना है।

विधानसभा क्लैश का कारण क्या है? / What Caused Awhad-Padalkar Assembly Clash?

इस झगड़े की जड़ है राजनीतिक बयानबाजी और व्यक्तिगत हमले।
गोपीचंद पडळकर, जो भाजपा के जाने-माने नेता और धनगर समाज के प्रमुख चेहरे हैं, उन्होंने हाल ही में अपने बयानों में शरद पवार और एनसीपी नेताओं पर तीखा हमला बोला था। उनका आरोप था कि शरद पवार सिर्फ कुछ गिने-चुने वर्गों की राजनीति करते हैं और किसानों तथा वंचित समाज की अनदेखी कर रहे हैं।

इन बयानों से नाराज होकर राष्ट्रवादी कांग्रेस (शरद पवार गट) के नेताओं और कार्यकर्ताओं में काफी गुस्सा था। इसी नाराजगी की वजह से विधानसभा परिसर में मौजूद आव्हाड समर्थकों ने पडळकर के खिलाफ नारेबाजी शुरू कर दी।

जवाब में भाजपा समर्थक भी भड़क उठे। देखते ही देखते मामूली बहस से बात धक्का-मुक्की और हाथापाई तक पहुंच गई। विधानसभा जैसी संवैधानिक जगह पर दोनों पक्षों के कार्यकर्ताओं ने एक-दूसरे पर आरोप-प्रत्यारोप के साथ शारीरिक झड़प कर डाली।

असल वजह यही है – शरद पवार और एनसीपी पर पडळकर द्वारा की गई तीखी टिप्पणियां, जिनका विरोध करते हुए आव्हाड समर्थक भिड़ गए।

अध्यक्ष-सभापति ने की कार्रवाई की मांग / Speaker-Chairman Seek Action
इस शर्मनाक घटना के बाद विधानसभा अध्यक्ष और सभापति ने इस पूरे मामले में कड़ी कार्रवाई की मांग की है। उनका कहना है कि विधानसभा जैसी जगह पर हाथापाई की अनुमति नहीं दी जा सकती। ये सिर्फ लोकतंत्र का अपमान नहीं है, बल्कि संविधान की मर्यादाओं का सीधा उल्लंघन है।

अब सबकी निगाहें महाराष्ट्र सरकार और विशेष रूप से उपमुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस पर टिक गई हैं। सवाल ये है कि क्या फडणवीस निष्पक्ष रहकर दोषियों पर कार्रवाई करेंगे, चाहे वे किसी भी पार्टी से हों? या फिर भाजपा कार्यकर्ताओं को राजनीतिक लाभ पहुंचाने के लिए मामला दबा दिया जाएगा?

कुछ लोग यह भी सवाल पूछ रहे हैं कि विधानसभा परिसर के भीतर सुरक्षा व्यवस्था इतनी कमज़ोर कैसे हो सकती है, कि दो गुट आपस में भिड़ जाएं और किसी को पता ही न चले?

आखिर ये सिर्फ एक झगड़ा था?
या पहले से रची गई कोई राजनीतिक साजिश?

क्या विधानसभा अब नेताओं के निजी झगड़ों का अखाड़ा बन चुकी है?

अब असली सवाल जनता के लिए है – क्या लोकतंत्र अब नेताओं की गंदी राजनीति का अखाड़ा बन चुका है? जहां जनता के मुद्दों पर चर्चा होनी थी, वहां अब नेताओं के समर्थक गुंडागर्दी कर रहे हैं।

आज के नेताओं को न तो जनता के सवालों की परवाह है और न ही संविधान की गरिमा की। उन्हें बस एक ही काम करना है – अपनी पार्टी और अपने नेता का अंध समर्थन। विधानसभा के भीतर हुआ ये झगड़ा सिर्फ एक घटना नहीं, बल्कि साफ संकेत है कि राजनीति अब जनता की नहीं, बल्कि नेताओं की व्यक्तिगत लड़ाइयों की राजनीति बन चुकी है।

देवेंद्र फडणवीस के ऊपर ये जिम्मेदारी है कि वो इस मामले में सख्त और निष्पक्ष कार्रवाई करें। लेकिन क्या वाकई ऐसा होगा? या फिर सत्ता पक्ष में होने का फायदा उठाकर भाजपा कार्यकर्ताओं को बचा लिया जाएगा?

सच्चाई यही है – आज की राजनीति में सत्ता का बचाव ही असली एजेंडा बन चुका है।
जनता सिर्फ तमाशा देख रही है। और सबसे दुखद बात ये है कि शायद जनता को अब ये तमाशा देखने की आदत पड़ चुकी है।

अगर अब भी सवाल नहीं पूछे गए, तो अगला झगड़ा शायद संसद में हो… और अगली बार गिरेगा सिर्फ लोकतंत्र

whatsapp image 2025 07 18 at 11.17.48 61c9f1aa