मुफ्त बिजली और शिक्षक भर्ती: Nitish Kumar की राजनीति का नया दांव?

बिहार के वर्तमान मुख्यमंत्री Nitish Kumar एक बार फिर नई घोषणाओं के साथ चर्चा में हैं। 125 यूनिट तक मुफ्त बिजली और सरकारी स्कूलों में शिक्षकों की भर्ती का एलान उनकी नई राजनीतिक रणनीति का हिस्सा है, या फिर यह वाकई बिहार के विकास की शुरुआत है?

मुख्यमंत्री महोदय के नेतृत्व में सरकार लंबे समय से चल रही है, लेकिन हर चुनाव के करीब पहुंचते ही मुफ्त योजनाओं और नौकरियों का वादा क्यों याद आता है?

125 यूनिट मुफ्त बिजली: मुफ्त की राजनीति या असली विकास?

Nitish Kumar ने हाल ही में घोषणा की है कि 1 अगस्त 2025 से राज्य के हर घरेलू उपभोक्ता को 125 यूनिट तक बिजली मुफ्त दी जाएगी। इसके अलावा अगले 3 वर्षों में 10 हजार मेगावाट सौर ऊर्जा उत्पादन का लक्ष्य रखा गया है।

लेकिन सवाल ये है कि बीते 15-20 वर्षों से बिहार की सत्ता में बैठे मुख्यमंत्री को मुफ्त बिजली देने का विचार अब क्यों आया? क्या यह बिहार के विकास का हिस्सा है, या 2025 के विधानसभा चुनाव को ध्यान में रखकर तैयार की गई एक चुनावी रणनीति?

मुफ्त देने का वादा करना तो आसान है, लेकिन इसका आर्थिक बोझ कौन उठाएगा? राज्य की कमज़ोर अर्थव्यवस्था पर मुफ्त बिजली योजना कहीं और बोझ तो नहीं बढ़ा देगी?

सौर ऊर्जा संयंत्र की योजना को भी राजनीति की नजर से देखने की जरूरत है। क्या ये सच में आम लोगों को लाभ पहुंचाने के लिए है, या बड़े कॉर्पोरेट और कंपनियों के लिए नया बिजनेस मॉडल तैयार किया जा रहा है?

कुटीर ज्योति योजना जैसी पहले की कई योजनाओं का हश्र बिहार की जनता देख चुकी है, ऐसे में नई योजना पर भरोसा करना कितना सही है?

शिक्षक भर्ती: रोजगार का वादा या चुनावी सपना?

Nitish Kumar ने सरकारी स्कूलों में शिक्षकों की खाली सीटें भरने के लिए TRE-4 भर्ती परीक्षा जल्द आयोजित करने का निर्देश दिया है। इसमें 35% आरक्षण बिहार की महिलाओं को मिलेगा।

लेकिन सवाल वही है – Nitish Kumar इससे पहले भी 2-3 बार मुख्यमंत्री रह चुके हैं, तब शिक्षकों की कमी और बेरोजगार युवाओं की परेशानी का हल क्यों नहीं निकाला गया? 20 साल से सत्ता में रहने के बावजूद अब जाकर ये भर्ती की याद क्यों आई? क्या मुख्यमंत्री को अब समझ आया है या फिर 2025 के चुनाव से पहले युवाओं को नौकरी का सपना दिखाकर वोट बैंक मजबूत करने की कोशिश हो रही है?

TRE-4 परीक्षा का एलान करके Nitish Kumar शायद बेरोजगार युवाओं को यह भरोसा देना चाह रहे हैं कि अब नौकरी मिलने वाली है, लेकिन बिहार का इतिहास बताता है कि यहाँ नौकरियों की घोषणाएं तो होती हैं, मगर नियुक्ति प्रक्रिया पूरी होने में सालों लग जाते हैं।

Nitish Kumar की राजनीति: वादों का विकास या सत्ता बचाने की जुगत?

Nitish Kumar को बिहार की राजनीति में विकास पुरुष कहा जाता है, लेकिन आज भी बिहार का युवा रोजगार के लिए दूसरे राज्यों में पलायन कर रहा है। सरकारी स्कूल शिक्षक विहीन हैं, अस्पतालों की हालत बदहाल है और उद्योगों का तो नामोनिशान ही नहीं है।

ऐसे में सवाल उठता है – मुफ्त बिजली और नौकरी की घोषणाओं से बिहार बदलेगा या सिर्फ Nitish Kumar की राजनीतिक सत्ता बचाई जाएगी?

वोट बैंक की राजनीति में Nitish Kumar को अब जनता की असली जरूरतें दिख नहीं रहीं क्या

वोट दो, लेकिन सवालों के साथ।

क्या हमें, एक जिम्मेदार जनता के तौर पर, नेताओं से सिर्फ मुफ्त की चीजें मांगनी चाहिए?
हमें खुद से यह सवाल करना होगा कि हम नेताओं से सवाल पूछना कब सीखेंगे?
हर योजना, हर फैसला सिर्फ चुनाव के वक्त ही क्यों आता है?
हम, जनता, नेताओं को सत्ता मिलने के बाद ही क्यों याद आते हैं?

अब वक्त है कि हम मुफ्त के लालच से निकलकर उनसे विकास का हिसाब मांगें।
जब तक जनता सवाल नहीं पूछेगी, तब तक राजनीति में सिर्फ मुफ्त की राजनीति चलती रहेगी।
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nitish kumar